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अभियुक्त की लिखित सहमति के बिना पॉलीग्राफ़ परीक्षण नहीं किया जा सकता
17 मार्च 2021
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने हाल ही में फैसला सुनाया कि पॉलीग्राफी टेस्ट उर्फ "झूठ डिटेक्टर टेस्ट" आरोपी की लिखित सहमति के बिना नहीं किया जा सकता। अदालत ने आगे कहा कि आरोपी की चुप्पी मात्र सहमति नहीं मानी जा सकती।
न्यायमूर्ति सूरज गोविंदराज मार्च 2020 के ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें आरोपी, एक पार्टी आयोजक और एक ड्रग मामले में आरोपी को पॉलीग्राफ टेस्ट से गुजरने और अपने फोन और ईमेल खातों का बायोमेट्रिक पासकोड/पासवर्ड प्रदान करने का निर्देश दिया गया था। आरोपी खन्ना ने तर्क दिया कि "आपत्तिजनक तकनीकों के अनैच्छिक प्रशासन" ने उसकी स्वतंत्रता को प्रतिबंधित कर दिया और उसकी निजता का घोर उल्लंघन किया।
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने विस्तृत परिस्थितियां निर्धारित कीं जिनके तहत अधिकारियों को वैध परीक्षण करने की अनुमति दी गई।
- अभियुक्त या उसके वकील को दिया जाने वाला आवेदन/
- पॉलीग्राफ परीक्षण के प्रभाव और परिणामों के बारे में आरोपी को सूचित करने के बाद, बिना किसी संदेह के, उसकी सहमति ली जानी चाहिए।
- यदि कोई व्यक्ति पॉलीग्राफ परीक्षण कराने से इनकार करता है, तो ऐसा कोई परीक्षण नहीं कराया जाएगा।
माननीय न्यायालय ने कहा कि पॉलीग्राफ टेस्ट का निर्देश देने से पहले ट्रायल कोर्ट को आरोपी की सहमति पर विचार करना चाहिए था। न्यायालय ने ट्रायल कोर्ट के पिछले आदेश को खारिज कर दिया।
लेखक: पपीहा घोषाल
पीसी: आईप्लीडर