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पोक्सो अधिनियम के प्रावधानों के प्रभावी अनुपालन के लिए दिशानिर्देश - बॉम्बे हाईकोर्ट
8 अप्रैल 2021
बॉम्बे उच्च न्यायालय ने हाल ही में पोक्सो के प्रावधानों के प्रभावी कार्यान्वयन और विभिन्न चरणों में न्यायिक प्रक्रिया के दौरान पीड़ितों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं।
बॉम्बे हाईकोर्ट की पीठ ने निर्देश दिया:
- विशेष किशोर पुलिस इकाई (एसजेपीयू) ने कहा कि यदि आवेदन अभियोजक या बचाव पक्ष द्वारा प्रस्तुत किया जाता है, तो एसजेपीयू को आवेदन की सेवाओं और सुनवाई की सूचना के बारे में संबंधित अदालत को सूचित करना होगा।
- यदि पीड़ित को सेवा प्रदान करना संभव न हो तो लिखित रूप में कारण बताया जाना चाहिए।
- यदि नोटिस जारी करने के बाद पीड़ित का परिवार सुनवाई में उपस्थित नहीं होता है, तो न्यायालय ऐसे नोटिस की उपस्थिति के बिना ही कार्यवाही आगे बढ़ाएगा या दूसरा नोटिस जारी करेगा।
यह फैसला एक सामाजिक कार्यकर्ता- अर्जुन मालगे द्वारा दायर याचिका के बाद आया है, जिसमें POCSO, CrpC के प्रावधानों का पालन न करने और न्यायिक कार्यवाही में नाबालिग पीड़िता की उपस्थिति की मांग की गई थी। मालगे की ओर से पेश वकील ने POCSO अधिनियम की धारा 40, POCSO नियम 2020 के नियम 4 और उप-नियम 13 और Crpc की धारा 439 (1-A) का उल्लेख किया और प्रस्तुत किया कि ऐसे कई उदाहरण हैं जहाँ पुलिस और ट्रायल कोर्ट ने इन प्रावधानों का दुरुपयोग किया और इनका पालन करने में विफल रहे।
मालगे ने उच्च न्यायालय से उचित दिशा-निर्देश मांगे। पीठ ने महाराष्ट्र के सत्र न्यायालय के सभी पीठासीन अधिकारियों, महाराष्ट्र के महानिदेशक, अभियोजन निदेशकों, महाराष्ट्र पुलिस अधीक्षकों और महाराष्ट्र राज्य के कानूनी अधिकारियों को निर्णय की प्रति वितरित करने का निर्देश दिया।
लेखक: पपीहा घोषाल
पीसी: नागालैंड पेज