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समलैंगिक विवाह को मान्यता देने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई
मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में भारत का सर्वोच्च न्यायालय समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने की मांग करने वाले लोगों के अनुरोधों पर सुनवाई करेगा। सुनवाई 18 अप्रैल, मंगलवार को शुरू होगी और बेंच में अन्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय किशन कौल, एस रवींद्र भट, पीएस नरसिम्हा और हिमा कोहली होंगे।
ये अनुरोध करने वाले लोगों का मानना है कि LGBTQIA+ समुदाय को अपनी पसंद के व्यक्ति से शादी करने का अधिकार होना चाहिए। हालाँकि, केंद्र सरकार ने समलैंगिक जोड़ों द्वारा किए गए इन अनुरोधों का विरोध किया है। उनका कहना है कि समलैंगिक विवाह का विचार पारंपरिक भारतीय परिवार इकाई की अवधारणा के साथ फिट नहीं बैठता है, जिसमें जैविक पुरुष और महिला के बच्चे होते हैं।
जमीयत-उलमा-ए-हिंद नामक धार्मिक संगठन ने भी इसी तरह के विचार व्यक्त किए हैं और कहा है कि समलैंगिक विवाह एक ऐसी अवधारणा है जो पश्चिमी संस्कृति से आई है और इसे भारत पर नहीं थोपा जाना चाहिए। दूसरी ओर, दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने याचिकाकर्ताओं का समर्थन किया है और उनका मानना है कि समलैंगिक जोड़ों को भी दूसरों की तरह ही गोद लेने और उत्तराधिकार के अधिकार मिलने चाहिए।