अभी परामर्श करें

समाचार

सुरक्षित और स्वास्थ्यकर भोजन का उपभोग करने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा है - गुजरात हाईकोर्ट

यह लेख इन भाषाओं में भी उपलब्ध है: English | मराठी

Feature Image for the blog - सुरक्षित और स्वास्थ्यकर भोजन का उपभोग करने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा है - गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात उच्च न्यायालय ने हाल ही में अवैध मांस की दुकानों को राहत देने से इनकार करते हुए कहा कि सुरक्षित और स्वच्छ भोजन का उपभोग करने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का एक हिस्सा है। न्यायालय ने इस बात पर भी जोर दिया कि सुरक्षित भोजन सुनिश्चित करना राज्य अधिकारियों की जिम्मेदारी है, जो विभिन्न क़ानूनों में निर्धारित खाद्य सुरक्षा नियमों को लागू करने और लागू करने के लिए बाध्य हैं। न्यायालय ने मांस और चिकन की दुकान के मालिकों द्वारा दायर कई आवेदनों में राहत देने से इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने अपने व्यवसाय को जारी रखने की अनुमति मांगी थी, जिन्हें नागरिक अधिकारियों द्वारा बंद कर दिया गया था।

दुकानों को बंद करने का न्यायालय का निर्णय एक जनहित याचिका पर आधारित था, जिसमें दावा किया गया था कि दुकानें विभिन्न अनिवार्य मानदंडों का उल्लंघन करते हुए चल रही थीं। जनहित याचिका में शीर्ष न्यायालय के निर्णयों और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के प्रावधानों को लागू करने की भी मांग की गई है, जिसके अनुसार पशुओं को केवल लाइसेंस प्राप्त बूचड़खानों में ही काटा जाना चाहिए। जनहित याचिका के अनुसार, गुजरात भर में हजारों दुकानें "बिना मुहर लगे" मांस बेच रही थीं, जिसका अर्थ है कि मांस लाइसेंस प्राप्त बूचड़खानों से नहीं खरीदा गया है, बल्कि स्थानीय दुकानों में जानवरों को मारकर खरीदा गया है।

हालांकि, दुकान मालिकों ने तर्क दिया कि उन्हें अपना व्यवसाय करने का अधिकार है और उनके पेशे की रक्षा की जानी चाहिए। फिर भी, अदालत ने सभी नागरिकों के लिए सुरक्षित और स्वच्छ भोजन सुनिश्चित करने के महत्व का हवाला देते हुए दुकानों को बंद करने के फैसले को बरकरार रखा।

न्यायालय ने फैसला सुनाया कि व्यवसाय करने का अधिकार पूर्ण अधिकार नहीं है, और दुकानदारों को धार्मिक अवसरों के आधार पर मांस का व्यवसाय करने या बूचड़खाने चलाने की अप्रतिबंधित स्वतंत्रता नहीं मिल सकती, यदि वे कानूनी मानदंडों का पालन नहीं करते हैं। न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि आवेदकों ने अधिनियमों या विनियमों के किसी भी प्रावधान को चुनौती नहीं दी है, जो उनके खिलाफ की गई कार्रवाई का आधार बने।

न्यायालय ने कहा कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 तथा खाद्य सुरक्षा विनियमों द्वारा मांस की दुकानों पर स्वच्छता एवं अन्य मानकों को बनाए रखने के लिए लगाए गए प्रतिबंध विक्रेताओं एवं बूचड़खानों के मालिकों के अपने व्यवसाय चलाने के अधिकार पर उचित प्रतिबंध हैं। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी बूचड़खानों एवं मांस की दुकानों को बंद करने का आदेश नहीं दिया गया है, तथा मानदंडों का अनुपालन करने वालों को अपना व्यवसाय जारी रखने की अनुमति दी गई है।

My Cart

Services

Sub total

₹ 0