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पत्रकारों को फ्रंट लाइन वर्कर के रूप में वर्गीकृत करने के निर्देश की मांग को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट में जनहित याचिका
हाल ही में एक जनहित याचिका में महाराष्ट्र सरकार से पत्रकारों और मीडिया उद्योग को फ्रंटलाइन वर्कर्स के रूप में वर्गीकृत करने का निर्देश देने की मांग की गई।
पत्रकारों के संगठन मुंबई मराठी पत्रकार संघ ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। उनका कहना है कि देश के बारह राज्यों ने पत्रकारों और अन्य मीडियाकर्मियों को पहले ही आवश्यक या फ्रंट लाइन कर्मचारी घोषित कर दिया है। महाराष्ट्र सरकार ने पत्रकारों को इस सूची में शामिल नहीं किया है, इसलिए संघ को हाईकोर्ट जाने के लिए मजबूर होना पड़ा।
कोविड-19 के दौरान राज्य सरकार ने पूरे राज्य में सीआरपीसी की धारा 144 लागू कर दी थी, जिससे पत्रकारों को अपने कर्तव्यों का पालन करने में काफी परेशानी हुई। ऐसी बाधाओं का सामना करने के बाद भी उन्हें अभी भी श्रेणी में नहीं रखा गया है। याचिका में आगे कहा गया है कि प्रामाणिक जानकारी मीडिया के माध्यम से भारत के लोगों तक पहुँचती है, और इसलिए पत्रकारों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।
इसके अलावा, मुंबई जैसे शहर में, अधिकांश पत्रकार और मीडिया उद्योग के कर्मचारी लोकल ट्रेनों पर निर्भर हैं, जिनका उपयोग वर्तमान में आवश्यक सेवाओं में लगे लोगों को करने की अनुमति है।
जनहित याचिका में पत्रकारों को मुंबई की लोकल ट्रेनों का उपयोग करने की अनुमति देने के निर्देश देने की भी मांग की गई।
लेखक: पपीहा घोषाल