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बिना सहमति के फोन लाइन टैप करना या कॉल रिकॉर्ड करना व्यक्ति की निजता का उल्लंघन है - दिल्ली हाईकोर्ट
मामला: संजय पांडे बनाम प्रवर्तन निदेशालय
दिल्ली उच्च न्यायालय ने गुरुवार को कहा कि बिना सहमति के फोन लाइन टैप करना या कॉल रिकॉर्ड करना व्यक्ति की निजता का उल्लंघन है।
न्यायमूर्ति जसमीत सिंह के अनुसार, संविधान के अनुच्छेद 21 द्वारा प्रदत्त निजता का अधिकार, बिना सहमति के टेलीफोन वार्तालाप को रिकॉर्ड करने पर रोक लगाता है।
न्यायमूर्ति सिंह ने के.एस. पुट्टस्वामी बनाम भारत संघ मामले में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को साक्ष्य के रूप में उद्धृत किया कि निजता एक अविभाज्य अधिकार है तथा स्वतंत्रता के अधिकार का प्रयोग करने के लिए एक पूर्व शर्त है।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दर्ज धन शोधन मामले में मुंबई के पूर्व पुलिस प्रमुख संजय पांडे को जमानत देने के आदेश में उपरोक्त टिप्पणियां की गईं।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी (एफआईआर) के अनुसार, पांडे की कंपनी, आईसीईसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के कर्मचारियों के साथ फोन कॉल रिकॉर्ड की थी।
एमटीएनएल के फोन कथित तौर पर टेलीग्राफ अधिनियम, भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की कई धाराओं, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम का उल्लंघन करते हुए अवैध रूप से टैप किए गए।
न्यायमूर्ति सिंह ने पांडे को जमानत देते हुए कहा कि टेलीग्राफ अधिनियम के ये प्रथम दृष्टया उल्लंघन धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत अपराध नहीं बनते, भले ही एनएसई और आईसीई ने कॉल रिकॉर्ड करते समय गोपनीयता और सहमति को नजरअंदाज किया हो।