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शीर्ष अदालत ने कहा कि पटाखों के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता

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सुप्रीम कोर्ट ने इस साल काली पूजा, दिवाली, छठ पूजा, गुरु नानक जयंती, क्रिसमस की पूर्व संध्या और नए साल की पूर्व संध्या जैसे त्योहारों के दौरान पश्चिम बंगाल राज्य में पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश को खारिज कर दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि पटाखों के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध का कोई व्यापक आदेश नहीं दिया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2021 और अक्टूबर 2021 में ग्रीन पटाखों को अनुमति देते हुए पटाखों में बेरियम साल्ट के इस्तेमाल पर पहले ही प्रतिबंध लगा दिया था। हालांकि, कलकत्ता हाईकोर्ट ने इस आधार पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया कि ग्रीन पटाखों और बेरियम साल्ट पटाखों के बीच अंतर करने की कोई व्यवस्था नहीं है। इसलिए, यह अधिकारियों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए एक असंभव कार्य होगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शीर्ष अदालत द्वारा पारित आदेश हर राज्य पर लागू होता है।

29 अक्टूबर, 2021 को कलकत्ता हाईकोर्ट ने कोविड-19 महामारी और बिगड़ती वायु गुणवत्ता के कारण इस साल पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया। साथ ही, त्योहारों के लिए केवल मोम या तेल आधारित दीयों का उपयोग करने का निर्देश दिया।

उच्च न्यायालय के समक्ष बहस के दौरान, पश्चिम बंगाल राज्य ने पूर्ण प्रतिबंध का विरोध करते हुए कहा कि एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट ने सीमित तरीके से "हरित पटाखों" के उपयोग की अनुमति दी है।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने दलील दी कि कई पटाखा निर्माता ग्रीन क्रैकर लेबल लगाकर प्रतिबंधित पटाखों का इस्तेमाल करते हैं। पीठ ने इस बात से सहमत होने से इनकार कर दिया और साथ ही सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा दर्ज किए गए मामलों पर भी गौर किया।


लेखक: पपीहा घोषाल

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