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व्यवसाय और अनुपालन

संस्थापकों के लिए स्टार्टअप अनुपालन और शासन चेकलिस्ट

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1. स्टार्टअप अनुपालन और गवर्नेंस क्या है?

1.1. कॉरपोरेट गवर्नेंस का अर्थ

1.2. मुख्य अंतर

1.3. शुरुआत से ही दोनों क्यों जरूरी हैं?

2. स्टार्टअप्स के लिए अनुपालन और गवर्नेंस क्यों महत्वपूर्ण है? 3. स्टार्टअप अनुपालन और गवर्नेंस चेकलिस्ट 4. चरण-दर-चरण अनुपालन और गवर्नेंस की रूपरेखा (Blueprint)

4.1. व्यवसाय की स्थापना (Business Formation)

4.2. संस्थापक और स्वामित्व दस्तावेज

4.3. कॉरपोरेट गवर्नेंस प्रक्रियाएं

4.4. नियामक और आरओसी (ROC) अनुपालन

4.5. वित्तीय और टैक्स अनुपालन

4.6. रोजगार व एचआर अनुपालन

4.7. बौद्धिक संपदा (IP) की सुरक्षा

4.8. अनुबंध और जोखिम प्रबंधन

4.9. फंडिंग और निवेशकों के लिए तैयारी

5. हर साल कौन से अनुपालन अनिवार्य हैं? 6. स्टार्टअप्स द्वारा की जाने वाली आम गलतियां क्या हैं? 7. वैधानिक ढांचा और कानूनी नियम

7.1. वैधानिक प्रावधान

7.2. महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय (Judicial Precedents)

8. निष्कर्ष

स्टार्टअप अनुपालन (compliance) और गवर्नेंस का मतलब है कानूनी, नियामक, कर और सचिवीय (secretarial) जिम्मेदारियों को पूरा करना और साथ ही एक पारदर्शी निर्णय लेने का ढांचा तैयार करना। एक व्यवस्थित अनुपालन और गवर्नेंस चेकलिस्ट का पालन करने से काम में पारदर्शिता बनी रहती है, भारी जुर्माने से बचाव होता है, संस्थापकों (founders) के बीच विवाद कम होते हैं और फंडिंग के दौरान निवेशकों का भरोसा बढ़ता है।

स्टार्टअप अनुपालन और गवर्नेंस क्या है?

स्टार्टअप अनुपालन का अर्थ है सरकार और कानूनों जैसे कंपनी अधिनियम 2013, आयकर अधिनियम 1961 और जीएसटी अधिनियम 2017 के तहत तय की गई अनिवार्य कानूनी आवश्यकताओं, टैक्स देनदारियों, श्रम नियमों और कॉरपोरेट खुलासों का पालन करना। इनका पालन न करने पर जुर्माना लग सकता है, डायरेक्टर को अयोग्य घोषित किया जा सकता है या कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

कॉरपोरेट गवर्नेंस का अर्थ

कॉरपोरेट गवर्नेंस नियमों, प्रक्रियाओं और प्रणालियों का वह आंतरिक ढांचा है जो यह तय करता है कि कंपनी का संचालन और प्रबंधन कैसे होगा। यह संस्थापकों, निदेशकों, शेयरधारकों और कर्मचारियों के बीच अधिकारों का सही संतुलन बनाए रखता है।

मुख्य अंतर

अनुपालन अनिवार्य होता है, जो केवल बाहरी कानूनी नियमों को पूरा करने पर ध्यान देता है। दूसरी ओर, गवर्नेंस एक रणनीतिक और दूरदर्शी सोच है, जो आंतरिक जवाबदेही, नैतिक कामकाज और कंपनी के दीर्घकालिक मूल्य की सुरक्षा पर केंद्रित होती है।

शुरुआत से ही दोनों क्यों जरूरी हैं?

शुरुआती चरण के स्टार्टअप अक्सर कानूनी बारीकियों के बजाय अपने प्रॉडक्ट पर ध्यान देते हैं। हालांकि, कानूनी नियमों की अनदेखी से छिपी हुई देनदारियां खड़ी हो सकती हैं। जब निवेशक जांच करते हैं, तो कानूनी कमियां या बौद्धिक संपदा (IP) के अधिकारों की अनसुलझी स्थिति फंडिंग में बाधा बन सकती है या कंपनी का मूल्यांकन घटा सकती है।

स्टार्टअप्स के लिए अनुपालन और गवर्नेंस क्यों महत्वपूर्ण है?

  • कानूनी जुर्माने और अयोग्यता से बचाव: समय पर टैक्स और वैधानिक फाइलिंग करने से जुर्माना नहीं लगता और कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 164(2) के तहत डायरेक्टर अयोग्य घोषित होने से बच जाते हैं।
  • निवेशकों का भरोसा मजबूत होना: साफ़-सुथरा कैप टेबल (Cap Table), ऑडिट किए गए वित्तीय दस्तावेज और सही वैधानिक रिकॉर्ड्स से वेंचर कैपिटल (VC) और एंजेल इन्वेस्टर्स का भरोसा बढ़ता है।
  • संस्थापकों और शेयरधारकों के विवादों में कमी: स्पष्ट फाउंडर्स एग्रीमेंट, इक्विटी वेस्टिंग शेड्यूल और बोर्ड बैठकों के औपचारिक रिकॉर्ड्स से शेयर आवंटन और कंपनी के भविष्य से जुड़े विवाद टलते हैं।
  • पारदर्शिता और बेहतर निगरानी: मानक लेखा प्रथाओं और गवर्नेंस से पैसों की धोखाधड़ी और अनधिकृत खर्चों पर रोक लगती है।
  • फंडिंग प्रक्रिया में तेजी: व्यवस्थित और नियमानुसार तैयार रखे गए रिकॉर्ड्स से निवेशकों की जांच जल्दी पूरी होती है और फंडिंग आसानी से मिल जाती है।
  • बिजनेस की निरंतरता: सही कॉरपोरेट रिकॉर्ड्स होने से कंपनी सरकारी ऑडिट, टैक्स जांच और मुख्य अधिकारियों के जाने के बाद भी बिना रुकावट चलती रहती है।

स्टार्टअप अनुपालन और गवर्नेंस चेकलिस्ट

चरण-दर-चरण अनुपालन और गवर्नेंस की रूपरेखा (Blueprint)

ये चरण निम्नलिखित हैं:

व्यवसाय की स्थापना (Business Formation)

  • संरचना का चयन: अपने फंडिंग लक्ष्यों के आधार पर सही इकाई (प्राइवेट लिमिटेड कंपनी, एलएलपी, या पार्टनरशिप) चुनें। ध्यान दें: संस्थागत वीसी (VC) निवेशक आमतौर पर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की मांग करते हैं।
  • पंजीकरण (Incorporation): MCA पोर्टल के माध्यम से SPICe+ (INC-32) फॉर्म भरकर रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट, कॉरपोरेट आइडेंटिटी नंबर (CIN), पैन (PAN) और टैन (TAN) प्राप्त करें।
  • टैक्स और स्थानीय रजिस्ट्रेशन: यदि टर्नओवर तय सीमा से अधिक है (या इनपुट टैक्स क्रेडिट के लिए स्वेच्छा से) तो जीएसटी रजिस्ट्रेशन लें। साथ ही आवश्यकतानुसार दुकान और प्रतिष्ठान अधिनियम (Shops and Establishment Act) व प्रोफेशनल टैक्स रजिस्ट्रेशन कराएं।

संस्थापक और स्वामित्व दस्तावेज

फाउंडर्स एग्रीमेंट: एक कानूनी समझौता करें जिसमें इक्विटी बंटवारा, भूमिकाएं, पूंजी योगदान, बौद्धिक संपदा अधिकार और बाहर निकलने के तंत्र का स्पष्ट उल्लेख हो।

  • वेस्टिंग शेड्यूल (Vesting Schedules): किसी संस्थापक के समय से पहले अलग होने पर कंपनी की इक्विटी की सुरक्षा के लिए 1 साल के क्लिफ (cliff) के साथ 4 साल का मानक वेस्टिंग शेड्यूल लागू करें।
  • AoA में नियमों को शामिल करना: सुनिश्चित करें कि शेयर ट्रांसफर प्रतिबंध, पहले इनकार का अधिकार (ROFR), और अन्य शर्तों को कंपनी के रजिस्टर्ड AoA में स्पष्ट रूप से जोड़ा जाए।

कॉरपोरेट गवर्नेंस प्रक्रियाएं

  • निदेशक और मुख्य कर्मचारी: शुरुआती निदेशकों की नियुक्ति करें, डायरेक्टर आइडेंटिफिकेशन नंबर (DIN) प्राप्त करें और आवश्यक सहमति एवं घोषणा फॉर्म (DIR-2 और MBP-1) जमा करें।
  • बोर्ड और शेयरधारकों की बैठकें:
    • पहली बोर्ड बैठक: कंपनी रजिस्ट्रेशन के 30 दिनों के भीतर (धारा 173(1) के तहत) आयोजित की जानी चाहिए।
    • आगे की बोर्ड बैठकें: हर साल कम से कम चार बोर्ड बैठकें होनी चाहिए, और दो बैठकों के बीच 120 दिन से अधिक का अंतर नहीं होना चाहिए। छोटी कंपनियों के लिए वर्ष में कम से कम दो बैठकें अनिवार्य हैं।
    • वार्षिक सामान्य बैठक (AGM): वित्त वर्ष समाप्त होने के छह महीने के भीतर धारा 96 के तहत एजीएम आयोजित करें।
  • वैधानिक रिकॉर्ड्स और प्रस्ताव: धारा 88 के तहत वैधानिक रजिस्टर (सदस्य रजिस्टर, निदेशक रजिस्टर) बनाए रखें और धारा 118 के तहत 30 दिनों के भीतर बैठकों की कार्यवाही (Minutes) दर्ज करें।

नियामक और आरओसी (ROC) अनुपालन

  • व्यापार शुरू करने की घोषणा (Form INC-20A): कंपनी रजिस्ट्रेशन के 180 दिनों के भीतर इसे फाइल करें। इसके बिना कंपनी न तो कारोबार शुरू कर सकती है और न ही कर्ज ले सकती है।
  • शेयर प्रमाणपत्र जारी करना व स्टाम्प ड्यूटी: धारा 56 के तहत रजिस्ट्रेशन के 60 दिनों के भीतर शेयरधारकों को शेयर प्रमाणपत्र जारी करें और लागू स्टाम्प ड्यूटी का भुगतान करें।
  • महत्वपूर्ण लाभकारी स्वामित्व (SBO): 10% या उससे अधिक अप्रत्यक्ष हिस्सेदारी रखने वाले व्यक्तियों की पहचान करें और धारा 90 के तहत Form BEN-2 में विवरण जमा करें।

वित्तीय और टैक्स अनुपालन

  • अकाउंटिंग और ऑडिट: धारा 128 के तहत खातों का उचित बही-खाता बनाए रखें। रजिस्ट्रेशन के 30 दिनों के भीतर पहले वैधानिक ऑडिटर की नियुक्ति करें और एजीएम के बाद Form ADT-1 जमा करें।
  • प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर:
    • टीडीएस (TDS): वेंडर भुगतान, वेतन और किराए पर टीडीएस काटें, इसे हर महीने जमा करें और त्रैमासिक टीडीएस रिटर्न भरें।
    • आयकर रिटर्न: हर साल कॉरपोरेट इनकम टैक्स रिटर्न (Form ITR-6) दाखिल करें और सीमा पार होने पर टैक्स ऑडिट रिपोर्ट जमा करें।
    • जीएसटी फाइलिंग: मासिक या त्रैमासिक जीएसटी रिटर्न (GSTR-1, GSTR-3B) और वार्षिक रिटर्न जमा करें।

रोजगार व एचआर अनुपालन

  • कर्मचारी दस्तावेज: सभी कर्मचारियों के साथ औपचारिक ऑफर लेटर, रोजगार अनुबंध, गैर-प्रकाशन समझौते (NDA) और आईपी हस्तांतरण की शर्तें तय करें।
  • पॉश (POSH) अधिनियम का पालन: 10 या उससे अधिक कर्मचारियों वाली कंपनियों को कार्यस्थल पर महिला यौन उत्पीड़न निवारण (POSH) अधिनियम, 2013 के तहत एक आंतरिक समिति (IC) बनानी होगी, नीति लागू करनी होगी और वार्षिक रिपोर्ट जमा करनी होगी।
  • पीएफ और ईएसआई रजिस्ट्रेशन: कर्मचारी संख्या की सीमा पूरी होने पर प्रोविडेंट फंड (EPF - 20 कर्मचारी) और कर्मचारी राज्य बीमा (ESI - 10 कर्मचारी) के लिए रजिस्ट्रेशन कराएं।

बौद्धिक संपदा (IP) की सुरक्षा

  • आईपी स्वामित्व और हस्तांतरण: सुनिश्चित करें कि सभी संस्थापक, कर्मचारी और बाहरी डेवलपर्स 'IP Assignment Agreement' पर हस्ताक्षर करें ताकि कोड, डिज़ाइन और ट्रेडमार्क का कानूनी स्वामित्व कंपनी के पास रहे, न कि व्यक्तिगत रूप से किसी व्यक्ति के पास।
  • ट्रेडमार्क और पेटेंट रजिस्ट्रेशन: ट्रेड मार्क्स अधिनियम, 1999 के तहत कंपनी के नाम और लोगो का ट्रेडमार्क पंजीकृत कराएं। नई तकनीकों और आविष्कारों के लिए पेटेंट के लिए आवेदन करें।

अनुबंध और जोखिम प्रबंधन

  • व्यावसायिक अनुबंध: एनडीए (NDA), सेवा समझौतों और ग्राहक/वेंडर अनुबंधों के लिए मानक प्रारूप का उपयोग करें जिसमें देयता (liability) और विवाद निवारण की स्पष्ट शर्तें हों।
  • डिजिटल अनुपालन व डेटा गोपनीयता: अपनी वेबसाइट/एप पर गोपनीयता नीति और नियम व शर्तें प्रदर्शित करें तथा डेटा सुरक्षा कानूनों का पालन करें।

फंडिंग और निवेशकों के लिए तैयारी

  • कैप टेबल (Cap Table) प्रबंधन: इक्विटी शेयर, कन्वर्टिबल सिक्योरिटीज, और ESOP की स्थिति दर्शाने वाली एक अपडेटेड कैप टेबल बनाए रखें।
  • मूल्यांकन (Valuation) व कानूनी फाइलिंग: निवेशकों को शेयर जारी करने से पहले:
    • कंपनी अधिनियम के तहत पंजीकृत मूल्यांकनकर्ता और विदेशी निवेश के लिए मर्चेंट बैंकर से वैल्यूएशन रिपोर्ट प्राप्त करें।
    • निजी प्लेसमेंट प्रक्रियाओं का पालन करें, प्रस्ताव पारित करें, Form MGT-14 फाइल करें और आवंटन के 15 दिनों के भीतर Form PAS-3 जमा करें।
    • विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) मिलने पर शेयर आवंटन के 30 दिनों के भीतर आरबीआई (RBI) के FIRMS पोर्टल पर FC-GPR फाइल करें।

हर साल कौन से अनुपालन अनिवार्य हैं?

प्राइवेट लिमिटेड स्टार्टअप्स को हर साल निम्नलिखित वार्षिक अनुपालन चक्र पूरा करना अनिवार्य है:

  1. Form AOC-4 (वित्तीय विवरण): एजीएम (AGM) के 30 दिनों के भीतर आरओसी के पास ऑडिटेड बैलेंस शीट, लाभ-हानि खाता और डायरेक्टर्स रिपोर्ट जमा करें।
  2. Form MGT-7 / MGT-7A (वार्षिक रिटर्न): एजीएम के 60 दिनों के भीतर कंपनी का वार्षिक रिटर्न दाखिल करें।
  3. Form DIR-3 KYC: DIN रखने वाले सभी निदेशकों का 30 सितंबर तक वार्षिक ई-केवाईसी (e-KYC) पूरा करें।
  4. Form MSME-1: सूक्ष्म और छोटे उद्योगों (MSME) के 45 दिनों से अधिक के बकाया भुगतानों का अर्धवार्षिक विवरण जमा करें।
  5. Form DPT-3: 30 जून से पहले जमा राशि या बकाया ऋणों का वार्षिक रिटर्न दाखिल करें।

स्टार्टअप्स द्वारा की जाने वाली आम गलतियां क्या हैं?

  • Form INC-20A दाखिल किए बिना काम शुरू करना: फॉर्म INC-20A दाखिल करने से पहले व्यापार शुरू करने या कर्ज लेने पर भारी जुर्माना लगता है और आगे की फाइलिंग रुक जाती है।
  • फाउंडर्स एग्रीमेंट और वेस्टिंग शर्तों का न होना: बिना वेस्टिंग क्लॉज के शुरुआत में ही बराबर शेयर बांटने से, कोई संस्थापक काम छोड़कर जाने के बावजूद बिना योगदान के बड़ा हिस्सा अपने पास रख सकता है।
  • SHA की शर्तों को AoA में शामिल न करना: शेयर ट्रांसफर और बिक्री से जुड़े प्रतिबंधों को कंपनी के रजिस्टर्ड AoA में शामिल न करने पर वे कानूनी रूप से लागू नहीं हो पाते।
  • आईपी ट्रांसफर समझौते (IP Assignment) की अनदेखी: अनुबंध पर काम करने वाले डेवलपर्स के साथ लिखित समझौता न करने पर बौद्धिक संपदा का अधिकार व्यक्ति के पास रह जाता है, जिससे फंडिंग के समय कानूनी अड़चन आती है।
  • आरओसी (ROC) फाइलिंग में देरी: Form AOC-4 या MGT-7 की समय सीमा चूकने पर रोजाना ₹100 का अतिरिक्त जुर्माना लगता है और लगातार चूक से डायरेक्टर अयोग्य हो सकते हैं।
  • व्यक्तिगत और कंपनी के फंड को मिलाना: संस्थापकों द्वारा व्यक्तिगत खर्चों के लिए कंपनी खाते का उपयोग करना कानूनी नियमों का उल्लंघन है और इससे टैक्स संबंधी गंभीर समस्याएं खड़ी हो सकती हैं।

वैधानिक ढांचा और कानूनी नियम

वैधानिक प्रावधान

  • कंपनी अधिनियम, 2013:
    • धारा 88: अनिवार्य वैधानिक रजिस्टर बनाए रखना।
    • धारा 118: बैठकों की कार्यवाही दर्ज करने के नियम।
    • धारा 134: निदेशकों के जिम्मेदारी बयानों (Directors' Responsibility Statement) की आवश्यकताएं।
    • धारा 164 व 166: निदेशकों की अयोग्यता के मानदंड और कानूनी कर्तव्य।
    • धारा 42 व 62: प्राइवेट प्लेसमेंट और तरजीही शेयर आवंटन प्रक्रियाएं।
  • आयकर अधिनियम, 1961:
    • धारा 56(2)(viib): शेयर जारी करने के मूल्यांकन से संबंधित नियम।
  • विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA), 1999:
    • प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI), सीमा पार इक्विटी आवंटन और आरबीआई (RBI) के पास अनिवार्य FIRMS/FC-GPR फाइलिंग को नियंत्रित करता है।

महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय (Judicial Precedents)

  • वी.बी. रंगराज बनाम वी.बी. गोपालकृष्णन: भारत के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने निर्णय दिया कि समझौते में शामिल शेयर ट्रांसफर पर निजी प्रतिबंध तब तक कंपनी या तीसरे पक्ष के खिलाफ लागू नहीं किए जा सकते, जब तक कि उन प्रतिबंधों को कंपनी के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन (AoA) में स्पष्ट रूप से शामिल न किया गया हो।
  • डेल एंड कैरिंगटन इन्वेस्टमेंट (पी) लिमिटेड बनाम पी.के. प्रतापन: सर्वोच्च न्यायालय ने पुष्टि की कि निदेशकों (directors) का कंपनी के प्रति नैतिक और कानूनी कर्तव्य (fiduciary duty) होता है। कंपनी की वास्तविक आवश्यकता के बिना केवल अल्पसंख्यक शेयरधारकों (minority shareholders) की हिस्सेदारी कम करने के लिए किसी एक समूह को अतिरिक्त शेयर जारी करना अधिकारों का दुरुपयोग और कॉरपोरेट गवर्नेंस का उल्लंघन माना जाएगा।

निष्कर्ष

खाद्य व्यवसाय (food business) चालकों को नियामक नोटिसों और प्रवर्तन कार्रवाइयों को अनुपालन की गंभीर चेतावनी के रूप में लेना चाहिए। मामूली कमियों पर निरीक्षण रिपोर्ट या सुधार नोटिस मिल सकते हैं, जबकि लगातार उल्लंघन करने पर लाइसेंस निलंबित, रद्द या सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम में होने पर व्यवसाय आपातकालीन रूप से बंद किया जा सकता है। स्वच्छता बनाए रखना, उचित दस्तावेज रखना, समय पर सुधारात्मक कार्रवाई करना और वैध लाइसेंस रखना जुर्माने से बचने में मदद कर सकता है। यदि कोई कानूनी कार्रवाई की जाती है, तो व्यवसायों को तय समय सीमा के भीतर जवाब देना चाहिए और अपने हितों की रक्षा के लिए उपलब्ध अपील या कानूनी उपायों का उपयोग करना चाहिए।

अस्वीकरण (Disclaimer): यह ब्लॉग केवल जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। यदि आपको कानूनी सलाह की आवश्यकता है, तो कृपया किसी अनुभवी कॉरपोरेट वकील से संपर्क करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1. भारत में स्टार्टअप्स के लिए कौन से अनुपालन (compliances) अनिवार्य हैं?

एक प्राइवेट लिमिटेड स्टार्टअप के लिए अनिवार्य अनुपालनों में फॉर्म INC-20A (व्यापार शुरू करने की घोषणा) दाखिल करना, आवश्यक बोर्ड और शेयरधारक बैठकें आयोजित करना, मुहर लगे शेयर प्रमाणपत्र जारी करना, वैधानिक रजिस्टर बनाए रखना, वार्षिक आरओसी (ROC) रिटर्न (AOC-4 और MGT-7) दाखिल करना, डायरेक्टर DIR-3 KYC पूरा करना, और वार्षिक आयकर रिटर्न (ITR-6) व जीएसटी (GST) रिटर्न दाखिल करना शामिल है।

प्रश्न 2. स्टार्टअप शासन (startup governance) क्या है?

स्टार्टअप शासन एक आंतरिक ढांचा है, जिसमें बोर्ड की निगरानी, पारदर्शी अकाउंटिंग, इक्विटी वेस्टिंग नियम और स्पष्ट निर्णय लेने की प्रक्रियाएं शामिल हैं। यह यह तय करता है कि स्टार्टअप कैसे काम करेगा, संस्थापकों और निवेशकों की शक्तियों को कैसे संतुलित रखेगा, और नैतिक जवाबदेही कैसे बनाए रखेगा।

प्रश्न 3. क्या प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों के लिए कॉर्पोरेट गवर्नेंस (कॉर्पोरेट शासन) अनिवार्य है?

हाँ। हालांकि शेयर बाजार में लिस्टेड सार्वजनिक कंपनियों को सेबी (SEBI) के नियमों के तहत सख्त शासन कोड का सामना करना पड़ता है, लेकिन प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों को भी कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत कॉर्पोरेट शासन के नियमों का पालन करना पड़ता है। इसमें बोर्ड बैठकें, वैधानिक रिकॉर्ड, धारा 166 के तहत निदेशकों के कर्तव्य, ऑडिट की आवश्यकताएं और संबंधित-पक्ष लेनदेन (related-party transactions) का खुलासा शामिल है।

प्रश्न 4. यदि कोई स्टार्टअप आरओसी (ROC) फाइलिंग चूक जाता है तो क्या होता है?

देर से फाइलिंग करने पर प्रति फॉर्म ₹100 प्रति दिन का अतिरिक्त वैधानिक शुल्क लगता है। लगातार नियमों का पालन न करने पर कंपनी का 'सक्रिय व्यवसाय' दर्जा खत्म हो सकता है, कंपनियों के रजिस्ट्रार (ROC) द्वारा धारा 248 के तहत कंपनी बंद करने (strike-off) की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है, कंपनी और चूककर्ता अधिकारियों पर मौद्रिक जुर्माना लग सकता है, और धारा 164(2) के तहत निदेशकों को पांच साल के लिए अयोग्य घोषित किया जा सकता है।

प्रश्न5. क्या स्टार्टअप्स को संस्थापकों के समझौते (Founders' Agreement) की आवश्यकता होती है?

हाँ। एक संस्थापकों का समझौता (Founders' Agreement) तैयार करने से इक्विटी स्वामित्व, भूमिकाएं, वेस्टिंग शेड्यूल, बौद्धिक संपदा (IP) असाइनमेंट और बाहर निकलने (exit) की शर्तें स्पष्ट हो जाती हैं, जिससे संस्थापकों के बीच ऐसे विवादों को रोका जा सकता है जो कंपनी के अस्तित्व को खतरे में डाल सकते हैं।

लेखक के बारे में
ज्योति द्विवेदी
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ज्योति द्विवेदी ने अपना LL.B कानपुर स्थित छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय से पूरा किया और बाद में उत्तर प्रदेश की रामा विश्वविद्यालय से LL.M की डिग्री हासिल की। वे बार काउंसिल ऑफ इंडिया से मान्यता प्राप्त हैं और उनके विशेषज्ञता के क्षेत्र हैं – IPR, सिविल, क्रिमिनल और कॉर्पोरेट लॉ । ज्योति रिसर्च पेपर लिखती हैं, प्रो बोनो पुस्तकों में अध्याय योगदान देती हैं, और जटिल कानूनी विषयों को सरल बनाकर लेख और ब्लॉग प्रकाशित करती हैं। उनका उद्देश्य—लेखन के माध्यम से—कानून को सबके लिए स्पष्ट, सुलभ और प्रासंगिक बनाना है।

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